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Title

Aahardhaan

राजा सोम व श्रेयांसकुमार द्वारा मुनिराज ऋषभदेव को आहार दान

समस्त अन्तरंग-बहिरंग परिग्रह का त्याग कर राजा ऋषभदेव ने पंचमुष्टि केशलोंच एवं आत्मध्यान पूर्वक निर्ग्रन्थ दिगम्बर भावलिंगी मुनिदशा अंगीकार की। ऋषभदेव मुनिराज जब ध्यान में मग्न हुए तो छः महीने तक अखण्ड आत्मसाधना में तल्लीन रहे। अहो! आत्मानन्द का स्वाद, जिसके समक्ष स्वर्ग के विषय-भोगों को भोगने का विकल्प मात्र भी स्मृति में ना आये। छः महीने पश्चात जब मुनिराज ॠषभदेव आहार की प्रतिज्ञा लेकर वन से नगर की ओर आये, लेकिन जगत का ये कैसा आश्चर्य है! किसी को भी मुनिराज के प्रति आहार दान की विधि का ज्ञान ही नही है।

     आहारदान की विधि से अनभिज्ञ प्रजाजन मुनिराज ॠषभदेव को भिन्न-भिन्न प्रकार की भोग सामग्री प्रदान करते है। अरे! धिक्कार है! ये कैसी मूर्खता? जिन्होंने संसार की समस्त संपदा को तुच्छ जानकर उसका त्याग कर दिया है, उन्ही विषमय भोगों को उनके प्रति प्रस्तुत किया जा रहा है, ऐसा जानकर मुनिराज ऋषभदेव आगे बढ जाते और पुनः वन में लौट आते। यह प्रक्रिया छह महीने तक चलती रही और मुनिराज ऋषभदेव लगभग एक वर्ष से भी अधिक समय पूर्ण कर हस्तिनापुर नगर के समीप पधारे।

सिद्धार्थ नामक द्वारपाल आकर राजा सोम एवं श्रेयांस कुमार को सूचना देता है कि हे महाराज! अभी-अभी हस्तिनापुर नगरी में तीर्थंकर मुनिराज ऋषभदेव का मंगल प्रवेश हुआ। दोनों भाई सूचना पाकर राजमहल के प्रांगण में आते है और दूर से ही मुनिराज ऋषभदेव को पाकर अहो भाव का अनुभव करते हैं और नमस्कार करके नम्रीभूत होते हैं और ये देखो भवितव्यता आत्मार्थी श्रेयांसकुमार को मुनिराज ऋषभदेव का वीतरागी रूप देखकर पूर्वभव संबंधी जातिस्मरण ज्ञान हो जाता है।

पूर्वभव में उन्होंने दो मुनिराजों की वन में आहार दान दिया था। इस प्रकार आठ भव पहले श्रेयांसकुमार ने जो आहारदान दिया था, उस भव का उन्हें स्मरण हो गया और उन्हें मुनिराज ऋषभदेव को आहारदान देने का संस्कार जागृत हुआ। श्रेयांसकुमार, रानी लक्ष्मीमति एवं राजा सोम द्वारा मुनिराज ऋषभदेव ने वैशाख शुक्ल अर्थात अक्षय तृतीया के पावन दिन पर ईक्षु अर्थात गन्ने के रस का प्रासुक एवं 46 दोषों से रहित निरंतराय प्रथम आहार ग्रहण किया। देवों ने इस प्रसंग पर पंच आश्चर्य (रत्न वर्षा, पुष्प वर्षा, दुन्दुभि वादन, सुगंधित वायु एवं अहो दानम ध्वनि) किये और समस्त लोक में आनन्द छा गया।

Series

Sculpture Camp - Pune

Category

Sculptures

Medium

Glass Fibre

Size

Orientation

Portrait

Completion Year

17-Jan-2023