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चोर को देखने वाला भौंकता है - जिसप्रकार रात्रि के समय घर में चोरी करने आये चोर को देखकर कुत्ता भोंकता है, उसकी आवाज सुनकर शहर के बाकी कुत्ते भी भौं-भौं सुनकर भौंकने लगते है जबकि उन्होंने चोर को देखा भी नहीं है। उसीप्रकार आत्म स्वरूप के अनुभव से ज्ञानी पुरुष ऐसा कहते हैं कि “हम ही परमात्मा हैं”, परन्तु उनके शब्द सुनकर मिथ्यादृष्टि अज्ञानी भी जब कहता है कि “मैं ही परमात्मा हूँ”, तब उसे उन शब्दों की भाव-भासना नहीं है, वह मात्र शब्दों में ही कह रहा है, निश्चय से उसके शब्द और सम्यक ज्ञानी में परस्पर सूर्य-अंधकार के समान भेद है।
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