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Title

Naam Karma

नामकर्म

तुमरो नाम नहीं है स्वामी, नामकर्म तुमसे अलगामी।

शुद्ध व्यवहार में नाम अनन्ता, व्यक्तरूप श्रीजिन अरिहंता॥

जैसे चित्रकार अपनी बुद्धि व कला-कौशल्य से अनेक प्रकार के चित्र बनाता है, उन्हें आकार देता है, उनमें रंग भरता है। अब चित्रों में आकृति का रंग-रूप चित्रकार पर आश्रित है, इसमें किसी का गुण-दोष समाहित नहीं है; ठीक उसीप्रकार नामकर्म रूपी चित्रकार के निमित्त से ही यह अरूपी आत्मा रूपी पुद्गलमयी देह को प्राप्त करता है, कभी मोटा, कभी पतला, कभी छोटा-बडा, सुन्दर-कुरूप देह को प्राप्त करता है, इसमें जीव के पूर्वकृत कर्म ही निमित्त हैं, परन्तु भीतर तो सकल कर्म मल से रहित शुद्धात्मा ही विराजित है, उसकी दृष्टि ही सकल सुख में कारणभूत है।

Series

Samyakgyan Deepika

Category

Paintings

Medium

Charcoal on Paper

Size

24" x 30"

Orientation

Landscape

Artist

Yuvraj Patil

Completion Year

16-Mar-2019