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नकली घोडा - जैसे कोई बालक मिट्टी के घोड़े के साथ प्रीति करता है, खेलता है वह भी दुःखी है तथा कोई सच्चे घोड़े के साथ प्रीति करता है वह भी दुःखी है, कारण उस नकली घोड़े को कोई तोड़े-फोड़े तथा दूसरे असली घोड़े को भी कोई चारा-पानी न दे व मारे तो वे दोनों ही दुःखी हैं; वैसे ही जो कोई मिट्टी, पत्थर, चित्राम और काष्ठ की झूठी देवमूर्ति के साथ प्रेम-प्रीति करता है वह भी दुःख का ही कारण है तथा कोई सच्चे वीतरागी देव के साथ भी प्रेम-प्रीति करता है वह भी दुःख का ही कारण है, क्योंकि वे दोनों ही इस जीव को सुखी नहीं कर सकते अर्थात् स्वभाव वस्तु से भिन्न होकर परवस्तु के साथ प्रेम-प्रीति करेगा तो दुःख का ही अनुभव करेगा।
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