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Title

Swabhav Surya

स्वभाव सूर्य – देखो! इस चित्र में दिखाया है कि प्रत्येक दृष्टि से वस्तु के विभिन्न पक्षों को जाना जा सकता है, कोई भी व्यक्ति किसी वस्तु को अपनी दिशा, दृष्टिकोण या स्थान के आधार पर देखता और समझता है। पूर्ववासी उसे पश्चिम में मानता है, अन्य का निषेध करता है; पश्चिमवासी पूर्व में कहता है, अन्य का निषेध करता है; दक्षिणवासी उत्तर में कहता है, अन्य का निषेध करता है और उत्तरवासी उसे दक्षिण में कहता है, अन्य का निषेध करता है इत्यादि एक ही वस्तु के संबंध में अनेक मत हो सकते हैं; होते हैं। लेकिन जैसे वस्तु का वास्तविक स्वरूप इनमें से किसी एक विशेष दिशा में सीमित नहीं होता, उसीप्रकार निश्चयांलबी व्यवहार का निषेध करता है और व्यवहारालंबी निश्चय का। परन्तु कोई वस्तु को कैसे मानता है उससे उस वस्तु का स्वरूप निश्चित नहीं करता अपितु वह वस्तु वास्तव में कैसी है, यह उसके यथार्थ स्वरूप के आधार से तय होता है।

Series

Samyakgyan Deepika

Category

Paintings

Medium

Charcoal on Paper

Size

24" x 30"

Orientation

Landscape

Artist

Yuvraj Patil

Completion Year

03-Apr-2018