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Title

Dhwani Tu Hi

ध्वनि तूं ही - जिसप्रकार एक खाली भवन में चिल्लाने पर उसकी प्रतिध्वनि सुनाई पडती है, तब यदि वह सोचे कि यह ध्वनि किसी ओर की है तो वह मूर्ख ही होगा, क्योंकि वह ध्वनि उसी की है। उसीप्रकार स्वभाव के भवन में यदि देखेंगें तो वह स्वसम्यग्ज्ञानमयी परमात्मा, “सो हम” अर्थात मैं ही हूँ और कोई नहीं।

Series

Samyakgyan Deepika

Category

Paintings

Medium

Charcoal on Paper

Size

24" x 30"

Orientation

Landscape

Artist

Yuvraj Patil

Completion Year

12-Aug-2019