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ध्वनि तूं ही - जिसप्रकार एक खाली भवन में चिल्लाने पर उसकी प्रतिध्वनि सुनाई पडती है, तब यदि वह सोचे कि यह ध्वनि किसी ओर की है तो वह मूर्ख ही होगा, क्योंकि वह ध्वनि उसी की है। उसीप्रकार स्वभाव के भवन में यदि देखेंगें तो वह स्वसम्यग्ज्ञानमयी परमात्मा, “सो हम” अर्थात मैं ही हूँ और कोई नहीं।
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