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Title

Ishtopdesh Gatha 15

लोभी को धन इष्ट है

आयुर्वृद्धिक्षयोत्कर्ष हेतुं कालस्य निर्गमम् ।

वाञ्छतां धनिनामिष्टं जीवितात्सुतरां धनम् ॥१५॥

आयु क्षय धनवृद्धि को, कारण काल प्रमान।

चाहत हैं धनवान धन, प्राणनितें अधिकान ॥१५॥

अर्थ: मोहवश यह जीव धन-सम्पदा में इतना मस्त है कि इसे अपना आता हुआ काल दिखाई नहीं देता। लालसा इतनी हो जाती है कि यदि धन किसी को उधार दे तो सोचता है कि जितना काल बीतता जायेगा, उतनी ही ब्याज की आमदनी बढती जायेगी। वह यह विचार नहीं करता कि जितना काल बीत रहा है उतनी मेरी आयु भी घट रही है। स्वयं से अनभिज्ञ यह जीव धन बढाने की चाह में प्राण जाने का भय भी नहीं करता। इसप्रकार के व्यामोह का कारण होने से ऐसे धन को धिक्कार है।

Series

Ishtopdesh

Category

Paintings

Medium

Acrylic on Canvas

Size

66" x 24"

Orientation

Landscape

Artist

Manoj Sakale

Completion Year

01-May-2023

Gatha

15