Title
After seeing Lord Aadinath; the poet does not find satisfaction elsewhere. The poet feels that no one would like to drink salty sea water after having tasted the moon lit sparkling and sweet water derived from the ‘ocean of milk’. 11.
हे भगवन् | आपका रूप इतना सुन्दर है कि उसे देखते हुए आँखे पलक झपकाना ही नहीं चाहतीं | आपके मनोहर वीतरागी, स्वरूप का परिचय या दर्शन जिसने पा लिया, उसे कोई अन्य वस्तु सुन्दरता की दृष्टि से सन्तोषदायक नहीं प्रतीत होती | ठीक ही है, - जिसने क्षीरसागर के स्वच्छ जल का पान किया हो, उस विवेकी को लवण समुद्र का खारा जल पीने की इच्छा होगी तो कैसे? अर्थात् कभी नहीं।
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Shlok