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Title

Samaysaar - Gatha No. 17,18

जैसे कोई धन का अर्थी पुरुष बहुत उद्यम से पहले तो राजा को जाने कि यह राजा है, फिर उसी का श्रद्धान करे कि “यह अवश्य राजा ही है,” इसकी सेवा करने से अवश्य धन कि प्राप्ति होगी, और फिर उसी का अनुचरण कर, आज्ञा में रहे, उसे प्रसन्न करे।

इसीप्रकार मोक्षार्थी पुरुष को पहले तो आत्मा को जानना चाहिए, और फिर उसी का श्रद्धान करना चाहिए कि “यही आत्मा है, इसका आचरण करने से अवश्य कर्मों से छूटा जा सकेगा” और फिर उसी का अनुचरण करना चाहिए – अनुभव के द्वारा उसी में लीन होना चाहिए।

(गाथा 17-18 टीका)

Series

Samaysaar Drashtant Vaibhav

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Completion Year

01-Jul-2018

Gatha

17, 18