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श्रुति (आगम), बुद्धि, बल, वीर्य, प्रेम, सुन्दरता, आयु, शरीर, कुटुंबीजन, पुत्र, स्त्री, भाई और पिता आदि सब ही चालनी में स्थित पानी के समान स्थिर नहीं हैं। देखते-देखते ही नष्ट होनेवाले हैं। इस बात को प्राणी देखता है तो भी खेद की बात है कि वह मोहवश आत्मकल्याण को नहीं करता है।
क्रमांक ३४. श्री सुभाषित रत्न-संदोह
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Bol