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Title

Subhashit Ratna samdoh - Bol 34

श्रुति (आगम), बुद्धि, बल, वीर्य, प्रेम, सुन्दरता, आयु, शरीर, कुटुंबीजन, पुत्र, स्त्री, भाई और पिता आदि सब ही चालनी में स्थित पानी के समान स्थिर नहीं हैं। देखते-देखते ही नष्ट होनेवाले हैं। इस बात को प्राणी देखता है तो भी खेद की बात है कि वह मोहवश आत्मकल्याण को नहीं करता है।

क्रमांक ३४. श्री सुभाषित रत्न-संदोह

Series

Vairagya Varsha

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Artist

Riaz Samadhan

Completion Year

01-Jan-2021

Bol

34