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Title

Aatmanu shashan - Bol 57

कोई अति निद्रावश मनुष्य को उसके मर्मस्थान पर मुद्गर की चोट मारे, अथवा अग्नि की उष्णता से देह को आँच लगे, अथवा कहीं बाजों की ध्वनि सुने तो वह तुरन्त जाग उठता है, परन्तु अविवेकी जीव को पाप कर्मफल के लगातार - एक के बाद एक-उदयरूप मुद्गरों की मार मर्मस्थान पर पड़ती रहती है, महादुःखरूप त्रिविध ताप से उसका शरीर निरन्तर जलता रहता है और आज यह मरा, कल वह मरा, अमुक ऐसे मरा, अमुक वैसे मरा, ऐसे यमराज के बाजों के भयंकर शब्द बारम्बार सुनने में आते हैं, तथापि वह महा अकल्याणकारी अनादि मोह निद्रा को किंचित् भी हटा नहीं पाता, यह परम आश्चर्य है।

क्रमांक ५७. श्री आत्मानुशासन

Series

Vairagya Varsha

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Artist

Riaz Samadhan

Completion Year

24-Sep-2019

Bol

57