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इस लोक में राजाओं के यहाँ तो घड़ी का घंटा बजता है और शब्द करता है सो सब के क्षणिकपन को प्रगट करता है; अर्थात् जगत को मानो पुकारपुकार कर कहता है कि हे जगत के जीवों! जो कुछ अपना कल्याण करना चाहते हो शीघ्र ही कर लो, नहीं तो पछताओंगे। क्योंकि यह जो घड़ी बीत गई वह किसी प्रकार भी पुन: लौट कर नहीं आयेगी, इसी प्रकार अगली घड़ी भी जो व्यर्थ ही खो दोगे तो वह भी गई हुई नहीं लौटेगी।
क्रमांक ५९. श्री ज्ञानार्णव
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Bol