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इस लोक में ग्रह, चंद्र, सूर्य, तारे तथा छह ऋतु आदि सब ही जाते और आते हैं अर्थात् निरंतर गमन-आगमन करते हैं। परंतु जीवों के गये हुए शरीर स्वप्न में भी कभी लौट कर नहीं आते। यह प्राणी वृथा इनसे प्रीति करता है ।
क्रमांक ७१. श्री ज्ञानार्णव
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Bol