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Title

Shree Gyanarnav - Bol 79

देखो! इन जीवों का प्रवर्तन कैसा आश्चर्यकारक है कि शरीर तो प्रतिदिन छीजता जाता है और आशा नहीं छीजती है; किन्तु बढ़ती जाती है, तथा आयुर्बल तो घटता जाता है और पाप कार्यो में बुद्धि बढ़ती जाती है, मोह तो नित्य स्फुरायमान होता है और यह प्राणी अपने हित वा कल्याण मार्ग में नहीं लगता है। सो यह कैसा अज्ञान का माहात्म्य है !

क्रमांक ७९. श्री ज्ञानार्णव

Series

Vairagya Varsha

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Artist

Riaz Samadhan

Completion Year

15-Jan-2020

Bol

79