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Title

Subhashit Ratna samdoh - Bol 118

विधि-दैव-भाग्य भुजंग के समान टेढ़ा चलता है। कभी वैभव के शिखर पर चढ़ता है तो कभी विपत्ति की खाई में गिरता है। आज श्रीमंत है तो कल दरिद्री बनकर घूमता फिरता है। जीवन पवन वेग की तरह चंचल है। धन कमाने में कष्ट, उसकी रक्षा करने में कष्ट, अंत में किसी कारण से धन का वियोग होने पर यह जीव अति कष्टित होता है। यौवन शीघ्र ही नष्ट प्राय: होता है। तथापि यह जीव संसार की नानाविध संकट-परंपरा से भयभीत नही होता। यह बड़ा आश्चर्य है।

क्रमांक ११८. श्री सुभाषित रत्न-संदोह

Series

Vairagya Varsha

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Artist

Riaz Samadhan

Completion Year

24-Sep-2019

Bol

118