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Title

Vruksh ko Pakda Hua Purush

वृक्ष को पकडा हुआ पुरुष - जिसप्रकार कोई पुरुष वन में किसी पेड को पकडकर कहे कि “मुझे इस वृक्ष ने पकड लिया है, मुझे इस बंधन से मुक्त कराओ।” तो यह सुनकर कोई विश्वास नहीं करेगा क्योंकि वृक्ष किसी को बाँध सकता नहीं, ठीक उसीप्रकार यह जीव स्वयं राग-द्वेष करके भी समस्त दोष कर्मों पर डाल देता है और कहता है कि इन कर्मों ने मुझे बाँध लिया है। वास्तव में ये जड कर्म चेतन जीव को कैसे बाँध सकते हैं, जीव बंधता भी अपने परिणामों से है और मुक्त भी अपने परिणामों से होगा। इसप्रकार जो बंध-मोक्ष से भिन्न होने की इच्छा करता है वह मिथ्यादृष्टि है।

Series

Samyakgyan Deepika

Category

Paintings

Medium

Charcoal on Paper

Size

24" x 30"

Orientation

Landscape

Artist

Yuvraj Patil

Completion Year

03-Apr-2018